चौंकाने वाले आंकड़े: मई में लाखों ने गंवाई नौकरी, सरकार की नीतियों पर सवाल
मई में शुरू हुए बेरोजगारी दर के आंकड़ों को जारी करने का सिलसिला जून में बुरी खबर लेकर आया है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के फ्रेश आंकड़ों के अनुसार मई के महीने में बेरोजगारी दर में इजाफा देखने को मिला है. ये बेरोजगारी दर शहर और गांव दोनों जगहों पर देखने को मिली है. खास बात तो ये है कि ये बेरोजगारी दर युवाओं में सबसे ज्यादा देखी गई है. वहीं दूसरी ओर मई के महीने में महिलाओं में भी बेरोजगारी दर का आंकड़ा बढ़ा है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकार की ओर से बेरोजगारी के आंकड़े किस तरह के सामने रखे हैं.
युवा बेरोजगारी दर बढ़ी
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार भारत की बेरोजगारी दर मई 2025 में बढ़कर 5.6 फीसदी हो गई, जो अप्रैल में 5.1 फीसदी थी. बेरोजगारी में वृद्धि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखी गई और विशेष रूप से युवाओं में यह बहुत ज़्यादा देखने को मिली है. 15-29 आयु वर्ग में, ग्रामीण भारत में बेरोजगारी दर अप्रैल में 12.3 फीसदी से बढ़कर मई में 13.7 फीसदी हो गई. शहरी क्षेत्रों में, युवा बेरोजगारी एक महीने पहले 17.2 फीसदी से बढ़कर मई में 17.9 फीसदी हो गई. महिलाओं में बेरोजगारी भी मई में बढ़कर 5.8 फीसदी हो गई, जो उसी महीने के दौरान पुरुषों के लिए दर्ज की गई 5.6 फीसदी दर से थोड़ी अधिक है.
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन में भी गिरावट
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन जो 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों के रेश्यो को मापती है जो या तो काम कर रहे हैं या सक्रिय रूप से काम की तलाश कर रहे हैं – वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) में मई 2025 में 54.8 फीसदी थी, जो अप्रैल में 55.6 फीसदी से कम देखने को मिली है. ग्रामीण इलाकों में ये पार्टिसिपेशन 56.9 फीसदी पर देखने को मिला, जोकि शहरों में 50.4 फीसदी देखने को मिला है. इस आयु वर्ग के पुरुषों के लिए, ग्रामीण और शहरी LFPR अप्रैल में 79.0% और 75.3% से क्रमशः 78.3% और 75.1% पर थोड़ा कम हो गया. ग्रामीण महिलाओं में, LFPR 36.9% पर काफी कम थी.
वर्कर रेश्यो में भी आई कमी
वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो (WPR) भी महीने-दर-महीने कम हुआ है. मई 2025 में, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो 54.1 फीसदी था, जबकि शहरी इलाकों में यह 46.9 फीसदी था. मई में समग्र वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो अप्रैल में 52.8 फीसदी से घटकर 51.7 फीसदी हो गया.
वर्क फोर्स में महिलाओं की भागीदारी कम रही, ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो 35.2 फीसदी और शहरी केंद्रों में सिर्फ़ 23.0 फीसदी रहा. कुल महिला वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो 31.3 फीसदी दर्ज की गई. हालांकि सरकार ने बेरोज़गारी में वृद्धि के कारणों की जानकारी नहीं दी, लेकिन डाटा रोज़गार सृजन में लगातार चुनौतियों को अंडरलाइन करता है, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए, जबकि भारत महामारी के बाद की इकोनॉमी में हाई ग्रोथ को बनाए रखे हुए है.
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