अंबेडकर स्मारक पर विशेष आयोजन और पुष्पांजलि
लखनऊ|उत्तर प्रदेश में आज डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है। प्रदेश में इस वर्ष आंबेडकर जयंती केवल स्मृति दिवस के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, जागरुकता और जनसंपर्क के व्यापक अभियान के रूप में मनाई जा रही है।
राजधानी लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने आवास पर डॉ. आंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित किया। इस मौके पर समर्थकों और कार्यकर्ताओं के नाम संदेश जारी किया।
इसमें कहा कि बाबा साहेब का जीवन देश के गरीबों, उपेक्षितों, शोषितों और जातिवाद एवं सामंतवाद से पीड़ित महिलाओं समेत 'बहुजन समाज' की सुरक्षा, सम्मान व उत्थान के लिए संघर्ष करते हुए बीता। इसकी गारंटी उन्होंने संविधान में सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक कार्य किया।
उन्होंने कहा कि यदि देश की केंद्र व राज्यों की सत्ता में रहने वाली पार्टियां बाबा साहेब के अति मानवतावादी, सर्वजन-हितैषी व बहुजन-कल्याणकारी संविधान के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सही से सफल हो पातीं तो भारत अभी तक आत्मनिर्भर और विकसित देश बन गया होता। साथ ही बहुजनों की गरीबी, बेरोजगारी, जातिवादी द्वेष, शोषण व जुल्म-ज़्यादती से मुक्त समता एवं न्याय-युक्त जीवन लोगों को जरूर दे पाता।
वहीं दूसरी ओर गोमती नगर के डॉ. आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर सुबह 9:30 बजे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके लिए राजधानी में एक दिन पहले से ही बसपा समर्थकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। सोमवार शाम तक 25 हजार से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक पहुंच चुके थे।
व्हाइट हाउस के पास ताबड़तोड़ फायरिंग से सनसनी, सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में हमलावर ढेर
भारत ने डेब्यूटेंट मानव सुथार पर जताया भरोसा, अफगानिस्तान के खिलाफ मिला मौका
DA में 2% बढ़ोतरी का ऐलान! जुलाई से इन कर्मचारियों की सैलरी में होगा इजाफा
आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे से पहले टीम इंडिया में बड़े बदलाव के संकेत
गहने गिरवी रख खेती को आधुनिक बनाया, अब सरकारी भुगतान का इंतजार
CM शिवकुमार का बड़ा आदेश, ऐप से दर्ज होगी कर्मचारियों की हाजिरी
कई राज्यों में खंगाले जा रहे ठिकाने, उधम सिंह की गिरफ्तारी पर 1 लाख का इनाम
सूरत की धरती से पीएम मोदी की हुंकार, कांग्रेस शासित राज्यों की बदहाली का किया दावा
मानवाधिकार हनन की नई सीमाएं: वैश्विक चिंताओं के बीच तिब्बत में बीजिंग की दमनकारी नीतियां
ओपनिंग डे पर किसने मारी बाजी? ‘है जवानी तो इश्क होना है’, ‘बंदर’ और ‘पेद्दी’ के आंकड़े आए सामने