PM मोदी ने वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत को दिखाई हरी झंडी, टाइमिंग पर उठे सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी-खजुराहो एक्सप्रेस वंदे भारत को हरी झंडी दिखाई और बनारस रेलवे स्टेशन से रवाना किया. इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी बनारस रेलवे स्टेशन पर मौजूद रहे. आठ कोच वाली ये वंदे भारत एक्सप्रेस बनारस से खजुराहो की 442 किलोमीटर की दूरी आठ घंटे में तय करेगी. वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से गुरुवार को छोड़कर बाकी के छह दिन सुबह 5:30 बजे रवाना होकर दोपहर 1:15 बजे ये खजुराहो पहुंचेगी.
विंध्याचल, प्रयागराज छिवकी, चित्रकूट धाम, बांदा, महोबा होते हुए ये ट्रेन खजुराहो पहुंचेगी. 594 यात्रियों की क्षमता वाली इस वंदे भारत ट्रेन में सात चेयरकार और एक एग्जीक्यूटिव क्लास यानी कुल आठ कोच होंगे. ऑल इंडिया टूरिस्ट गाइड फेडरेशन के नेशनल कोऑर्डिनेटर अजय सिंह इसे एक अच्छी पहल तो मान रहे हैं, लेकिन इसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
टाइमिंग पर जताया एतराज
डिजिटल से बातचीत में बताया कि इस रूट पर एक अच्छी ट्रेन की जरूरत थी और हमें खुशी है कि रेलवे ने हमारी जरूरत को समझा, लेकिन हमें इसकी टाइमिंग पर एतराज है. सुबह 5:30 बजे ट्रेन पकड़ने के लिए कौन सा क्रिमी लेयर टूरिस्ट 4:30 बजे उठेगा. अगर यही ट्रेन सुबह 9:30 बजे रहती तो बनारस की सुबह देखकर टूरिस्ट ये ट्रेन पकड़ लेता. अब सिर्फ बनारस की सुबह देखने के लिए वो एक रात अलग से तो रुकेगा नहीं, एक अच्छी पहल को सिर्फ टाइमिंग की वजह से पलीता लग जाएगा.
चित्रकूट के पर्यटन को मिलेगा बूस्ट
इस ट्रेन के चलने से जहां खजुराहो के पर्यटन को नया जीवन मिलेगा. वहीं चित्रकूट के पर्यटन को इससे बूस्ट अप मिलेगा. वाराणसी के टूरिज़्म को भी इससे लाभ मिलेगा. अभी वाराणसी-दिल्ली-खजुराहो के बीच सिर्फ एक ही फ्लाइट है और वो भी अक्टूबर से ही शुरू हुआ है. इसलिए इस ट्रेन की जरूरत तो थी, लेकिन इसकी टाइमिंग ठीक नहीं है. हम टूरिस्ट फेडरेशन के लोग रेल मंत्रालय से ये मांग कर रहे हैं कि इस ट्रेन को सुबह 5:30 की बजाय 9:30 बजे चलाया जाए.
क्रीमी लेयर टूरिस्ट के लिए अच्छा विकल्प
पर्यटन क्षेत्र में लंबे समय से काम करने वाले शैलेश त्रिपाठी कहते हैं कि इस ट्रेन के चलने से वाराणसी को दिल्ली-जयपुर-आगरा के गोल्डन ट्रायंगल के क्रीमी लेयर टूरिस्ट और अमेरिकी और यूरोपियन टूरिस्ट मिलने जा रहे हैं. वाराणसी के पर्यटन में क्रिमी लेयर टूरिस्ट करीब 50 प्रतिशत बढ़ेंगे. दिल्ली-खजुराहो-वाराणसी के बीच सिर्फ एक ही फ्लाइट है और उसमें भी निरंतरता नहीं है. कार से लंबी दूरी तय करने में टूरिस्ट परहेज करते हैं. ऐसे में ये वंदे भारत ट्रेन ऐसे क्रीमी लेयर टूरिस्ट के लिए ये एक अच्छा विकल्प है. वैसे तो हर टूरिस्ट का काशी में स्वागत है, लेकन हकीकत ये है कि बैग पैकर्स टूरिस्ट की संख्या चाहें जितना बढ़ जाए, लेकिन जब तक क्रिमी लेयर टूरिस्ट नही बढ़ेंगे. तब तक पर्यटन क्षेत्र को बूस्ट नहीं मिलने वाला. इस वंदे भारत ट्रेन से यही बूस्ट मिलने जा रहा है.
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