सही दिशा में रखें जरुरी दस्तावेज
अतीत, वर्तमान, भविष्य के लिए कुछ जरूरी कागजात सभी के साथ लगे होते हैं। ऐसे में इंश्योरेन्स, इंकम टैक्स, सेल्स टैक्स, वसीयत, जमीन की रजिस्ट्री के कागज, कोर्ट कचहरी के कागज, गिरबी एवं ब्याज के कागज, व्यापारिक दस्तावेज, मेडिकल फाईल, चेक बुक, पासबुक, एफ.डी, धार्मिक किताबें, शिक्षित योग्यता (मार्कशीट, रिजल्ट इत्यादि) शादी-विवाह का निमंत्रण पत्र, सम्मानित किया हुआ प्रशंसा पत्र इत्यादि को अपने घर या ऑफिस में किस स्थान पर रखें। यह भी बेहद अहम होता है अन्यथा नुकसान की संभावना रहती है।
वास्तुशास्त्र के संपूर्णं ज्ञान से चारो फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है यही मानव के लक्ष्य हैं।
हर एक दस्तावेज अपनी अहमियत रखता है। सबसे पहले भूखंड कि दिशाओं के बारे में आपको जानकारी दे दें। मुख्य दिशाएं चार होती है पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण। चार विदिशाएं होती है – आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य और ईशान। अलग-अलग दिशाओं मे रखने के लिए अलग-अलग दस्तावेज होते हैं। विद्वानों ने मार्गदर्शन दिया है सर्वप्रथम संपति-अनादिकाल से ही सम्पति बनाना, संपत्ति का संचय करना चला आ रहा है। प्राचीन काल में हाथी, घोड़े सम्पति का एक भाग होता था। श्रेष्ठी की पहचान करने में इनकी गिनती बोली जाती थी। समय का चक्र बदलता चला गया। आज संपत्ति का तात्पर्य सोना-चांदी, रुपए-पैसे, जमीन-जायदाद माना जा रहा है। प्राचीन समय से ही विद्वानों के मतान्तर रहे हैं कुछ विद्वानों का मत नैऋत्य कोण है। कुछ विद्वानों का मत उत्तर के मध्य कुबेर स्थान है। वैसे ज्यादातर नैऋत्य कोण में संपति रखने के परिणाम अच्छे पाए जाते हैं।
नैऋत्य कोण में कागजात रखते समय विशेष रखना चाहिए –
तिजोरी का मुख उत्तर की तरफ हो। तिजोरी जमीन से लगी हुई न हो।
तिजोरी लकड़ी के आसन पर विराजमान हो।
तिजोरी दीवार से लगी नहीं होनी चाहिए एवं दीवार के अंदर नहीं होनी चाहिए।
तिजोरी में इतर, सेंट, नेलकटर, छुरी-कैची, सरौता इत्यादि नहीं रखना चाहिए।
तिजोरी के ऊपर नीचे अगल-बगल में टॉयलेट, किचन नहीं आना चाहिए।
तिजोरी के ऊपर एवं अंदर काला एवं लाल रंग नहीं होना चाहिए।
नैऋत्य की तिजोरी धन संपत्ति को रोककर एंव संभाल कर रखने में सहायक होती है। उदाहरण के तौर पर सोना-चांदी, रुपए-पैसे, जमीन-जायदाद के कागजात, वसीयत के पेपर, एफ डी इंश्योरेंस इत्यादि।
वायव्य दिशा में क्यों ?
वायव्य दिशा में रखने का अर्थ हवा की तरह भागना है। इकंम टैक्स, सेल्स टैक्स, कोर्ट कचहरी के कागज जो किसी कारण वश आगे नहीं बढ़ पा रहा हो या उस जमीन-जायदाद का वायव्य कोण में रखना चाहिए। वायव्य कोण में रखने से उपरोक्त कार्य में आगे बढ़ने की चंचलता आ जाती है। आपका प्रयास सफल हो जाता है। सम्मानित मान-पत्र प्रशंसापत्र वायव्य में लगाने से ख्याति फैलती है।
ईशाण कोण में क्यों ?
इंकम टैक्स, सेल्स टैक्स, कोर्ट-कचहरी इत्यादि जिसमें हमारा पक्ष कमजोर हो, हमें जीत की संभावना कम हो उन्हें ईशाण कोण में रखने से लाभ प्राप्त होता है। कोई जायदाद क्रय करने के बाद उसमें कई प्रकार की कानूनी अड़चने आने लग जाती हैं उन कागजातों को भी ईशाण कोण में रखना चाहिए। धार्मिक किताबें, धार्मिक चित्र इत्यादि ईशान कोण में शोभित होते हैं।
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