भुजिया किंग शिवरतन अग्रवाल का निधन, बीकानेर में शोक की लहर
बीकानेर। नमकीन उद्योग की दुनिया में एक युग का अंत हो गया। शिवरतन अग्रवाल, जिन्हें स्नेहपूर्वक “फन्ना बाबू” के नाम से जाना जाता था, अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन की खबर ने न केवल बीकानेर बल्कि देश-विदेश में फैले लाखों प्रशंसकों और व्यापारिक जगत को गहरे शोक में डुबो दिया है।
भुजिया को वैश्विक पहचान दिलाने वाले फन्ना बाबू ने बीकानेर की मिट्टी से जुड़कर ऐसा साम्राज्य खड़ा किया, जिसने “बीकानेरी भुजिया” को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बना दिया। वे सिर्फ एक सफल उद्योगपति नहीं, बल्कि अपने शहर के प्रति समर्पण और सादगी की मिसाल थे। देश-विदेश से कई बार कॉरपोरेट ऑफिस स्थानांतरित करने के प्रस्ताव मिलने के बावजूद उन्होंने हमेशा बीकानेर को ही अपनी कर्मभूमि बनाए रखा।भुजिया के प्रति उनका प्रेम भी किसी किस्से से कम नहीं था। तीन बार हार्ट अटैक आने के बावजूद उन्होंने अपने प्रिय स्वाद से कभी दूरी नहीं बनाई। उनका जीवन जिंदादिली, दोस्ती और अपनत्व का प्रतीक रहा—वे सच में “दोस्तों के दोस्त” थे।विडंबना यह रही कि बीकानेर से अपार प्रेम करने वाले फन्ना बाबू ने अंतिम सांस चेन्नई में ली, जहां वे अपनी पत्नी के इलाज के सिलसिले में गए हुए थे।उनका जाना सिर्फ एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि बीकानेर की उस पहचान का खो जाना है, जिसने शहर को दुनिया के नक्शे पर चमकाया।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर फूटा लोगों का गुस्सा, शताब्दीपुरम पुलिस छावनी में तब्दील
'ड्रग्स केस में फंसा दूंगा' कहने वाले पुलिसकर्मी पर गिरी गाज, किया गया सस्पेंड
कैंची से घायल बच्चे की जान पर बनी आफत, डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी से बचाया
ऑटोइम्यून बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है आंखों और मुंह की ड्राइनेस, जानें बचाव के तरीके
प्रकृति का अनमोल खजाना है नागालैंड, मानसून में इन 5 जगहों का नजारा नहीं भूलेंगे
लोकसभा में शोर-शराबा, राज्यसभा स्थगित; विपक्ष के हंगामे से सदन की कार्यवाही प्रभावित
NH-49 पर बारिश का असर, निर्माणाधीन ओवरब्रिज की मिट्टी धंसने से आवागमन प्रभावित
बिहार विधानसभा में हाई वोल्टेज ड्रामा, धक्का-मुक्की से बढ़ा राजनीतिक तापमान
'शिकायतें बढ़ती जा रही हैं, समाधान नहीं'... प्रताप ग्रेवाल ने CM से मांगा जवाब
शिवभक्ति की अनोखी मिसाल, 7500 KM की कांवड़ यात्रा पर निकले रोहित पहुंचे राजनांदगांव