नोएडा: भारत में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अपनी संपत्ति की सुरक्षा करना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जरूरत बन गया है। आग, बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसी भी मेहनत से खड़े किए गए व्यापार या घर को पल भर में तबाह कर सकती हैं। वर्ष 2026 का सबसे बड़ा सबक यही है कि संपत्ति बनाने के साथ-साथ उसे बीमा के सुरक्षा कवच से ढंकना भी उतना ही जरूरी है।

संपत्ति बीमा: लापरवाही और सुरक्षा का बड़ा अंतर

नोएडा के दुकानदार विराज की कहानी एक चेतावनी की तरह है, जिन्होंने अपनी दुकान के इंटीरियर पर लाखों खर्च किए लेकिन बीमा को 'पैसे की बर्बादी' बताकर टाल दिया। भारत में संपत्ति बीमा को लेकर आज भी यही मानसिकता बनी हुई है, जिसके कारण देश में 'इंश्योरेंस प्रोटेक्शन गैप' औसतन 92-95% तक है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर 100 रुपये का नुकसान होता है, तो 95 रुपये का बोझ सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। हालांकि देश का बीमा बाजार बढ़ रहा है, लेकिन प्रॉपर्टी इंश्योरेंस के मामले में यह अभी भी जीडीपी के 1% से नीचे है।

बढ़ते प्राकृतिक जोखिम और घटती सुरक्षा

आंकड़े बताते हैं कि भारत में मौसम का मिजाज तेजी से बिगड़ रहा है। साल 2024 में जहां 322 दिन खराब मौसम दर्ज किया गया, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 331 दिन हो गई। 2022 से 2025 के बीच आपदाओं से होने वाली मृत्यु दर में 47% की वृद्धि हुई है। विशेषकर शहरी इलाकों में आग लगने की घटनाएं और औद्योगिक जोखिम अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गए हैं, जिससे वित्तीय सुरक्षा का महत्व और भी गहरा गया है।

कैसे तय होता है आपके घर का बीमा मूल्य?

होम इंश्योरेंस लेते समय यह समझना जरूरी है कि बीमा राशि संपत्ति के बाजार मूल्य (Market Value) पर नहीं, बल्कि उसके पुनर्निर्माण की लागत (Reconstruction Cost) पर आधारित होती है। इसे घर के निर्मित क्षेत्र (Square Feet) और निर्माण की वर्तमान दर से गुणा करके निकाला जाता है।

बीमा प्रीमियम और कवरेज का अनुमान:

कवरेज का प्रकार बीमा राशि अनुमानित वार्षिक प्रीमियम
केवल ढांचा (Structure) 18 लाख रुपये 1,200–2,000 रुपये
केवल सामान (Content) 5 लाख रुपये 500–1,200 रुपये
व्यापक कवर (Comprehensive) 23 लाख रुपये 1,500–3,000 रुपये
ऐड-ऑन्स के साथ 25 लाख रुपये+ 2,500–4,500 रुपये

IRDAI के नए नियमों से ग्राहकों को मिली बड़ी राहत

बीमा नियामक IRDAI ने अब पॉलिसीधारकों के अधिकारों को और मजबूत कर दिया है। अब कोई भी बीमा कंपनी केवल 'दस्तावेजों की कमी' का बहाना बनाकर क्लेम खारिज नहीं कर पाएगी। पॉलिसी लेते समय ही सभी जरूरी कागजात मांगना अनिवार्य है। साथ ही, अब ग्राहकों को यह आजादी है कि वे जब चाहें अपनी पॉलिसी कैंसिल कर सकते हैं और आनुपातिक आधार पर अपना प्रीमियम वापस पा सकते हैं। अब आग के बीमा के साथ बाढ़ या भूकंप जैसे कवर चुनना या हटाना पूरी तरह ग्राहक की इच्छा पर निर्भर है।