शिंदे का उद्धव गुट पर हमला: 'मंदिर लूट की जांच क्यों नहीं हुई?'
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा घोटाले को लेकर विपक्ष, विशेषकर शिवसेना (यूबीटी) द्वारा किए जा रहे हमलों का तीखा जवाब दिया है। विधान परिषद में मानसून सत्र के अंतिम दिन बोलते हुए मुख्यमंत्री ने अयोध्या मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने पलटवार करते हुए मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में हुई कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और विपक्षी खेमे पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सिद्धिविनायक मंदिर और राम मंदिर का मुद्दा
एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) और उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि अयोध्या मामले में रामभक्तों की भावनाओं को जो ठेस पहुंची है, उसका समर्थन कोई नहीं कर सकता और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रहते किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि जो लोग आज राम मंदिर पर सवाल उठा रहे हैं, उनके कार्यकाल के दौरान सिद्धिविनायक मंदिर के दानपात्र में लूट हुई थी। उन्होंने पूछा कि तब की सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश क्यों नहीं दिए थे, जबकि मनसे ने भी उस समय इन अनियमितताओं की ओर इशारा किया था।
आदेश बांदेकर ने दी आरोपों पर प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष और अभिनेता आदेश बांदेकर ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि यदि उन पर लगे अनियमितता के आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें मंदिर के सामने फांसी पर लटका दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि मंदिर के कार्यकारी अधिकारियों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है और उनके कार्यकाल को समाप्त हुए तीन साल हो चुके हैं। बांदेकर ने आशंका जताई कि पिछले तीन वर्षों में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है।
उद्धव ठाकरे पर तंज और राजनीतिक बयानबाजी
अपने संबोधन के दौरान शिंदे ने उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष करते हुए धार्मिक प्रतीकों और आस्था को लेकर कई तंज कसे। उन्होंने हनुमान चालीसा के पाठ और लंका दहन के संदर्भ में उद्धव ठाकरे द्वारा की गई हालिया टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए इसे 'नई कहानी' करार दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में हनुमान चालीसा पढ़ने की घोषणा करने पर सांसद नवनीत राणा और विधायक रवि राणा को जेल भेजने की कार्रवाई तत्कालीन सरकार के दौरान ही हुई थी।
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