मेटल सेक्टर में कमाई का मौका, लेकिन सही समय पर करें निवेश
मुंबई। कमोडिटी बाजार में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच यदि आप भी मेटल सेक्टर के शेयरों में पूंजी लगाने की योजना बना रहे हैं, तो फिलहाल आपको थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में इन शेयरों में पैसा लगाने के लिए जल्दबाजी दिखाना नुकसानदेह साबित हो सकता है। एक्सिस सिक्योरिटीज के मेटल विभाग के वरिष्ठ शोध विश्लेषक आदित्य वेलेकर का मानना है कि निवेशकों को मेटल स्टॉक्स में नए निवेश के लिए सही और निचले स्तरों का इंतजार करना चाहिए। इसका मुख्य कारण यह है कि मानसून के आगमन के साथ ही घरेलू बाजार में स्टील की कीमतें सीजनल रूप से कमजोर दौर में प्रवेश कर जाती हैं। हालांकि, दीर्घकालिक नजरिए से इस सेक्टर की बुनियाद मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन निकट भविष्य में होने वाली गिरावट खरीदारी के अधिक शानदार अवसर प्रदान कर सकती है।
मानसून के चलते कीमतों पर बढ़ेगा दबाव
बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि स्टील उत्पादक कंपनियों के चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के परिणाम बेहतर रहने के बाद भी आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव देखा जा सकता है। स्टील की मांग और इसकी दरें अब मौसमी रूप से कमजोर होने वाले मानसून के फेज में जा रही हैं, जिसके कारण टाटा स्टील जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में शॉर्ट-टर्म करेक्शन यानी गिरावट की पूरी संभावना बनी हुई है। ऐसे में नई पोजीशन बनाने के इच्छुक निवेशकों को तब तक रुकना चाहिए जब तक कि इन शेयरों का मूल्यांकन और अधिक आकर्षक स्तर पर न आ जाए।
फेरस और नॉन फेरस श्रेणी में पसंदीदा विकल्प
ब्रोकरेज हाउस ने इस गिरावट के दौर में भी कुछ चुनिंदा स्टॉक्स पर अपना भरोसा जताया है। फेरस यानी लौह धातु श्रेणी के शेयरों में जेएसडब्ल्यू स्टील को उनकी सूची में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इसके बाद स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), हिंदुस्तान कॉपर और टाटा स्टील जैसी कंपनियों के नाम आते हैं। जानकारों का कहना है कि यदि बाजार में और सुधार होता है, तो 'सेल' के शेयरों में वैल्यू बाइंग का एक बेहतरीन मौका बन सकता है। वहीं दूसरी तरफ, गैर-लौह यानी नॉन-फेरस श्रेणी में हिंडाल्को को सबसे पसंदीदा स्टॉक के रूप में देखा जा रहा है।
एल्युमीनियम और कॉपर के वैश्विक मूल्य अनुमान
अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं की कीमतों को लेकर ब्रोकरेज हाउस ने अपने दीर्घकालिक अनुमान साझा किए हैं। एल्युमीनियम के लिए आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान लगभग $3,000 प्रति टन का भाव रहने की उम्मीद है, जो बाद के वर्षों में आंशिक रूप से घटकर $2,800 से $2,900 प्रति टन तक आ सकता है। उत्पादन की बढ़ती लागत के चलते एल्युमीनियम की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। इसके अलावा, कॉपर कंसन्ट्रेट की वैश्विक किल्लत को देखते हुए तांबे की कीमतें $10,000 से $11,000 प्रति टन के उच्च स्तर पर टिकी रह सकती हैं, जो हिंडाल्को जैसी कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सावधानी की सलाह
विशेषज्ञों ने जिंदल स्टील एंड पावर के परिचालन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसके विदेशी प्लांट में प्रदूषण से जुड़े मुद्दे एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिससे कंपनी के लॉन्ग-टर्म निवेश की संभावनाओं पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। नॉन-फेरस धातुओं के क्षेत्र में नाल्को और श्याम मेटालिक्स के शेयर भी इस समय काफी आकर्षक नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों के बदलते परिदृश्य को देखते हुए निवेशकों को बाजार के निचले स्तरों पर ही दांव लगाने की सख्त हिदायत दी गई है।
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