जमीन कब्जाने वालों पर चलेगा प्रशासन का डंडा, हथियार लाइसेंस होंगे रद्द
जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में अब रसूखदारों और बाहुबलियों के लिए अपने पास हथियार (शस्त्र लाइसेंस) रखना बेहद टेढ़ी खीर साबित होने वाला है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने जमीनों पर अवैध कब्जे और गुंडागर्दी की बढ़ती शिकायतों को रोकने के लिए शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण (रिन्यूअल) की प्रक्रिया को अत्यधिक पारदर्शी, कठोर और जवाबदेह बनाने का एक बड़ा फैसला लिया है। नई नीति के तहत, अब हर 5 साल में शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा, जिसके लिए आवेदक को अपने क्षेत्र के पटवारी से एक विशेष चरित्र और संपत्ति सत्यापन रिपोर्ट (वेरिफिकेशन रिपोर्ट) जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
इस नए नियम के लागू होने से जबलपुर के हथियार धारकों, विशेषकर भू-माफियाओं और रसूखदारों के बीच हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने इस दिशा में तेजी से काम करना शुरू कर दिया है और लंबित फाइलों की जांच शुरू कर दी गई है।
पटवारी की रिपोर्ट तय करेगी हथियार रखने की पात्रता
नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत राजस्व विभाग को विशेष शक्तियां और जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं:
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अवैध कब्जे पर तुरंत एक्शन: क्षेत्र के पटवारी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह प्रमाणित करेंगे कि संबंधित लाइसेंस धारक या आवेदक के खिलाफ किसी की निजी या सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे, जबरन उगाही या जमीन हड़पने के प्रयास का कोई मामला दर्ज तो नहीं है।
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प्रभाव का गलत इस्तेमाल पड़ेगा भारी: यदि कोई व्यक्ति अपने रसूख या सामाजिक प्रभाव का दुरुपयोग कर विवादित जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश में शामिल पाया जाता है और यह तथ्य पटवारी की रिपोर्ट में सामने आता है, तो जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) द्वारा उसका शस्त्र लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निरस्त (रद्द) कर दिया जाएगा।
आर्म्स एक्ट के तहत सभी स्तरों पर होगा कड़ा वेरिफिकेशन
आर्म्स एक्ट 1959 (हथियार कानून) के स्थापित प्रावधानों के अनुसार, जिले में किसी भी नागरिक को शस्त्र लाइसेंस जारी करने या उसके नवीनीकरण की मंजूरी देने का अंतिम और संपूर्ण अधिकार केवल जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) के पास सुरक्षित होता है। यदि पुलिस, राजस्व या खुफिया विभाग के सत्यापन के दौरान किसी व्यक्ति के व्यवहार, सामाजिक आचरण या आपराधिक पृष्ठभूमि से सार्वजनिक शांति और सुरक्षा को थोड़ा सा भी खतरा उत्पन्न होने की आशंका पाई जाती है, तो प्रशासन उसका लाइसेंस रिन्यू करने पर तत्काल रोक लगाने के लिए पूरी तरह अधिकृत है। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब वेरिफिकेशन के दौरान किसी भी तरह की पैरवी या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के हौसले होंगे पस्त
प्रशासन की इस नई और सख्त नीति का मुख्य उद्देश्य समाज में डर और खौफ का माहौल बनाकर जमीनों की खरीद-फरोख्त करने वाले तत्वों पर नकेल कसना है। अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग अपनी आत्मरक्षा के नाम पर लिए गए हथियारों का प्रदर्शन विवादित जमीनों पर कब्जा करने, डराने-धमकाने और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने के लिए करते हैं।
अब ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए पुलिस विभाग और राजस्व विभाग (कलेक्टर कार्यालय) मिलकर एक संयुक्त टास्क फोर्स की तरह काम कर रहे हैं। जो भी लाइसेंस धारक तय मानकों, साफ छवि और पात्रता की शर्तों पर खरा नहीं उतरेगा, उसके हथियार को तुरंत संबंधित थाने में जमा कराकर लाइसेंस रद्द करने की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसे क्षेत्र में अमन-चैन कायम करने और कानून का राज स्थापित करने की दिशा में सरकार की एक बेहद प्रभावी पहल माना जा रहा है।
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