140 की स्पीड में टायर ब्लास्ट, खाई में समाई कार; मां-बेटी ने तोड़ा दम
आगरा। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फतेहाबाद थाना इलाके में बृहस्पतिवार दोपहर एक बेहद दर्दनाक कार हादसा सामने आया है। तेज रफ्तार कार का अचानक अगला टायर फट जाने की वजह से गाड़ी अनियंत्रित होकर डिवाइडर लांघती हुई दूसरी लेन में जा पहुंची। कई बार पलटने के बाद कार करीब 50 मीटर तक सड़क पर घिसटती चली गई। इस भयानक दुर्घटना के दौरान कार का गेट खुल गया, जिससे एक महिला उछलकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में उनकी 8 महीने की मासूम बेटी की जान चली गई, जबकि घायल इंजीनियर पति-पत्नी का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
मैनपुरी से लौट रहा था परिवार
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दयालबाग के ओम साईं रेजिडेंसी (अमर बिहार) के रहने वाले निशांत वशिष्ठ सैन्य इंजीनियरिंग सेवा (MES) में इंजीनियर हैं। वह अपनी पत्नी वैष्णवी (सॉफ्टवेयर इंजीनियर), 8 माह की बेटी यति और एक केयरटेकर आकांक्षा के साथ किसी काम से मैनपुरी गए थे। बृहस्पतिवार दोपहर करीब 12:10 बजे जब वे कार से दिल्ली वापस लौट रहे थे, तभी फतेहाबाद क्षेत्र में एक्सप्रेसवे पर यह हादसा हो गया।
धमाके के साथ टायर फटने के बाद बेकाबू हुई कार डिवाइडर की जाली को तोड़ते हुए आगरा से लखनऊ जाने वाली सड़क पर पलट गई। पुलिस और यूपीडा की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर सभी को फतेहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने बच्ची यति को मृत घोषित कर दिया। वहीं दंपती की गंभीर हालत को देखते हुए पहले उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज और बाद में सिकंदरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
25 फीट गहरी खाई में गिरीं पत्नी
हादसे के वक्त कार की अगली सीट पर बैठीं वैष्णवी अपनी बेटी के साथ थीं। जैसे ही कार पलटी, वह गाड़ी से बाहर छिटककर करीब पांच फीट ऊपर उछलीं और सड़क किनारे बनी 25 फीट गहरी पथरीली खाई में जा गिरीं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। वहीं पिछली सीट पर बैठी केयरटेकर आकांक्षा को मामूली चोटें आई हैं। बताया गया है कि यह परिवार दिल्ली में रहता है और एक महीने पहले ही छुट्टी पर घर आया था।
140 की रफ्तार और खुली सीट बेल्ट बनी वजह
यूपीडा के सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना के समय कार की रफ्तार लगभग 140 किलोमीटर प्रति घंटा होने का अनुमान है। तेज गति होने के कारण कार सुरक्षा जाली को पार कर दूसरी तरफ जा गिरी।
परिजनों ने बताया कि निशांत और वैष्णवी दोनों कामकाजी हैं, इसलिए वे बेटी की देखभाल के लिए मैनपुरी से केयरटेकर आकांक्षा को अपने साथ दिल्ली ले जा रहे थे। रास्ते में कार निशांत चला रहे थे। हादसे से कुछ देर पहले तक वैष्णवी ने सीट बेल्ट लगा रखी थी, लेकिन बेटी को गोद में लेने के लिए उन्होंने बेल्ट खोल दी थी। यही वजह रही कि गाड़ी अनियंत्रित होते ही वह बाहर की तरफ गिर गईं, जबकि सीट बेल्ट बंधी होने के कारण निशांत कार के अंदर ही सुरक्षित रहे।
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