शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद बदले ट्रंप के तेवर? ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति पर उठे सवाल
वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान और चीन के बीच जारी गतिरोध पर एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में वे किसी भी नए सैन्य टकराव के पक्ष में नहीं हैं। ट्रंप ने जानकारी दी कि हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक में ताइवान के संवेदनशील मुद्दे पर बेहद विस्तार से चर्चा हुई। चीनी दूतावास के अनुसार, दोनों महाशक्तियों ने रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने और आपसी सहयोग के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को एक सकारात्मक दिशा देने पर सहमति जताई है।
स्वतंत्रता की कोशिशों पर जिनपिंग की दोटूक और ट्रंप का रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान की संप्रभुता या स्वतंत्रता के किसी भी प्रयास के सख्त खिलाफ हैं और उनका मानना है कि ऐसी किसी भी कोशिश से क्षेत्र में एक बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। ट्रंप के अनुसार, जिनपिंग ने साफ तौर पर कहा कि वे ताइवान की आजादी के लिए कोई टकराव नहीं देखना चाहते। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस मसले पर उन्होंने स्वयं कोई सीधी प्रतिक्रिया देने के बजाय चीनी राष्ट्रपति के विचारों को गंभीरता से सुना। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या चीन के हमले की स्थिति में अमेरिकी सेना ताइवान की रक्षा करेगी, तो उन्होंने इस पर रहस्य बनाए रखते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी हुई मंत्रणा
चीन की यात्रा से वापस अमेरिका लौटते समय 'एयर फोर्स वन' विमान में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने बताया कि जिनपिंग के साथ वार्ता में ताइवान के अलावा ईरान और हथियारों की बिक्री जैसे महत्वपूर्ण विषय भी शामिल थे। ट्रंप ने रणनीतिक विश्लेषण साझा करते हुए कहा कि चीन अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के रास्ते आयात करता है। इसलिए, बीजिंग अपनी व्यापारिक सुरक्षा के लिए ईरान पर इस समुद्री मार्ग को हर हाल में खुला रखने का राजनयिक दबाव बना सकता है।
ताइवान की समुद्री सीमा में चीनी नौसेना की बढ़ती हलचल
इस कूटनीतिक हलचल के बीच, ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को अपनी समुद्री सीमा में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) के आठ युद्धपोतों और एक सरकारी जहाज की मौजूदगी दर्ज की है। ताइवानी सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि सुबह छह बजे तक इन चीनी जहाजों की संदिग्ध गतिविधियों की कड़ी निगरानी की गई और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी जवाबी कदम उठाए गए। गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना ही एक हिस्सा मानता है और 'वन चाइना' नीति के तहत उस पर संप्रभुता का दावा करता है, जबकि लोकतांत्रिक ताइवान अपनी स्वतंत्र सरकार और रक्षा प्रणाली के साथ खुद को एक अलग इकाई के रूप में देखता है।
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