भारत में बेरोजगारी दर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई
नई दिल्ली। देश के रोजगार परिदृश्य को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक पंद्रह वर्ष और उससे अधिक उम्र के नागरिकों के बीच बेरोजगारी का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है। अप्रैल महीने में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी की दर बढ़कर 5.2 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है, जो कि बीते छह महीनों के भीतर दर्ज किया गया सबसे उच्चतम स्तर है। मार्च के महीने में यह आंकड़ा 5.1 फीसदी पर दर्ज किया गया था, जबकि इससे पहले पिछले साल अक्टूबर के दौरान भी बेरोजगारी इसी तरह 5.2 फीसदी के ऊंचे स्तर पर देखी गई थी।
व्यापक सरकारी सर्वेक्षण में सामने आए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बदलते हालात
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा देश के पौने चार लाख से भी अधिक नागरिकों के बीच किए गए व्यापक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण से यह साफ हुआ है कि इस बार ग्रामीण और शहरी बाजारों में रोजगार की स्थिति अलग-अलग रही है। जहां एक तरफ देश के शहरी इलाकों में थोड़ी राहत देखने को मिली है और वहां बेरोजगारी दर मार्च के 6.8 फीसदी से कम होकर अप्रैल में 6.6 फीसदी पर आ गई, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अंचलों में स्थिति थोड़ी बिगड़ी है। गांवों में काम की कमी के कारण बेरोजगारी का आंकड़ा 4.3 फीसदी से छलांग लगाकर 4.6 फीसदी पर पहुंच गया है।
पुरुष और महिला वर्ग के बीच रोजगार के मोर्चे पर बढ़ता अंतर
श्रम बाजार के इस नए ब्योरे में लैंगिक आधार पर भी उतार-चढ़ाव साफ तौर पर नजर आ रहा है, जिसके तहत पुरुषों के बीच कुल बेरोजगारी मामूली बढ़त के साथ 5.1 फीसदी दर्ज की गई है। गांवों में रहने वाले पुरुषों के लिए रोजगार के अवसर कम हुए हैं, जिससे उनकी बेरोजगारी दर बढ़कर 4.7 फीसदी हो गई, जबकि शहरों में यह सुधरकर 5.9 फीसदी रह गई है। इसके उलट महिलाओं के मोर्चे पर भी चुनौतियां बढ़ी हैं और उनकी कुल बेरोजगारी दर बढ़कर 5.4 फीसदी के स्तर को छू गई है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी में विशेष रूप से इजाफा देखा गया है।
श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी और कार्यरत आबादी के अनुपात में गिरावट
ताजा आर्थिक आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात भी उजागर हुई है कि अप्रैल के दौरान देश की श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में गिरावट आई है और यह कम होकर पचपन फीसदी पर आ गई है। इसमें सबसे ज्यादा असर पंद्रह वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं की भागीदारी पर पड़ा है, जो मार्च के मुकाबले घटकर 33.9 फीसदी रह गई है। इसके साथ ही देश की कुल कार्यरत आबादी का अनुपात (डब्ल्यूपीआर) भी प्रभावित हुआ है, जो गांवों में कामगारों की संख्या घटने की वजह से राष्ट्रीय स्तर पर कम होकर 52.2 फीसदी दर्ज किया गया है।
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