डॉक्टर बना पेपर लीक का मास्टरमाइंड, 30 लाख देकर दो भाइयों ने खरीदा NEET पेपर
सीकर। चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित नीट-2026 परीक्षा की शुचिता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। राजस्थान के सीकर जिले से शुरू हुई जांच की आंच अब हरियाणा और उत्तराखंड तक पहुँच गई है, जहाँ एक बेहद संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने पाया है कि इस सिंडिकेट ने लाखों रुपयों के एवज में प्रश्नपत्रों का सौदा किया और इसके तार कई राज्यों के कोचिंग सेंटरों से जुड़े हुए थे। इस खुलासे के बाद पूरे देश के छात्र जगत में रोष व्याप्त है और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं।
राजस्थान से हरियाणा तक फैला करोड़ों का जाल
इस पूरे प्रकरण में जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पेपर लीक की यह साजिश बेहद सुनियोजित थी। जमवारामगढ़ के दो सगे भाई, मांगीलाल और दिनेश बिवाल, इस नेटवर्क की मुख्य कड़ी के रूप में सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि इन्होंने गुरुग्राम के एक डॉक्टर के साथ मिलकर करीब 30 लाख रुपये में प्रश्नपत्र का सौदा तय किया था। यह लेन-देन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में हुआ, जिसके बाद पेपर को सीकर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके परिजनों तक पहुँचाया गया। आरोपियों से पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि इस गिरोह को परीक्षा से एक माह पूर्व ही पेपर लीक होने की भनक लग गई थी।
पुराने चयन और पारिवारिक संलिप्तता पर गहराया संदेह
जांच एजेंसियों की रडार पर आए दिनेश बिवाल के परिवार की पृष्ठभूमि ने इस मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष भी इस परिवार के चार बच्चों का नीट में चयन हुआ था, जिसके चलते अब पुराने नतीजों पर भी संदेह की सुई घूमने लगी है। एजेंसियों को अंदेशा है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है। हरियाणा से गिरफ्तार किए गए यश यादव और अन्य आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि उस मुख्य केंद्र का पता लगाया जा सके जहाँ से यह प्रश्नपत्र पहली बार बाहर आया था। प्रशासन अब उन तमाम चेहरों को बेनकाब करने की कोशिश कर रहा है जिन्होंने मोटी रकम देकर भविष्य खरीदने का प्रयास किया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए 700 छात्रों तक पहुँचा सौदा
मामले की जांच का एक बड़ा सिरा उत्तराखंड के देहरादून से भी जुड़ा है, जहाँ से राकेश कुमार मंडवारिया की गिरफ्तारी हुई है। राकेश पर आरोप है कि उसने डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग करते हुए लगभग 700 छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुँचाने का काम किया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि पेपर को पहले एन्क्रिप्टेड डिजिटल फॉर्मेट में साझा किया गया और बाद में उसके प्रिंट निकालकर ऊँची कीमतों पर बेचा गया। कोचिंग हब के रूप में पहचाने जाने वाले सीकर की डिजिटल कुंडली खंगाली जा रही है, क्योंकि यहाँ व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग एप्स के जरिए उत्तर कुंजियाँ साझा किए जाने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
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