किलर फॉर्मूला: इजराइल ने बीते 40 दिनों में ईरान पर 18 हजार बम गिराए
तेलअवीव। इजरायल और ईरान के बीच पिछले 40 दिनों से चल रहे संघर्ष में इजरायली वायुसेना ने आक्रामक रणनीति अपनाते हुए 18,000 से ज्यादा बम गिराए हैं। आईडीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में 4,000 से अधिक सैन्य ठिकानों, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्चर्स और न्यूक्लियर प्लांट शामिल हैं, को निशाना बनाया गया है। इजरायल सवा चार बम प्रति लक्ष्य की रणनीति पर काम कर रहा है ताकि दुश्मन की सैन्य क्षमता को पूरी तरह नष्ट किया जा सके। इन हमलों से ईरान के पेट्रोकेमिकल और हथियार उत्पादन ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरान के साथ-साथ लेबनान में भी इजरायली हमले जारी हैं।
अप्रैल को लेबनान पर महज 10 मिनट में 100 से ज्यादा हमले किए गए, जिसमें 350 से अधिक लोग मारे गए। इजरायल का दावा है कि ये हमले हिजबुल्लाह के कमांड सेंटरों और हथियार डिपो को नष्ट करने के लिए किए गए हैं। इस युद्ध के कारण लेबनान में लाखों लोग बेघर हो गए हैं और मानवीय संकट गहरा गया है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की बात चल रही है, लेकिन इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और सिविल डिफेंस के अनुसार उस एक दिन में 250 से 350 से ज्यादा लोग मारे गए और 1100 से अधिक घायल हुए। यह लेबनान में हाल के सालों का सबसे खूनी दिन था। पूरे अभियान में लेबनान में 1000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं। इजरायल ने हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर, हथियार डिपो, ब्रिज और रसद मार्गों को नष्ट किया। कई पुल टूट गए जिससे दक्षिणी लेबनान में मदद पहुंचना मुश्किल हो गया है। इजरायल का दावा है कि इन हमलों में सैकड़ों हिजबुल्लाह लड़ाके मारे गए। लेबनान में लाखों लोग बेघर हो गए और देश में बड़ी तबाही मची है। इजरायल हर एक महत्वपूर्ण टारगेट को पूरी तरह खत्म करने के लिए बहुत ज्यादा बम गिरा रहा है. औसतन हर टारगेट पर 4.5 बम या उससे ज्यादा गोला-बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मकसद है कि कोई भी सैन्य सुविधा, मिसाइल या कमांड सेंटर बच न सके।
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