निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त हुए सरगुजा DEO
सरगुजा|सरगुजा में निजी स्कूल संचालकों की मनमानी सामने आई है. जहां बच्चों की किताबें और ड्रेस चुनिंदा दुकानों से ही खरीदने के लिए पालकों पर अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है. इस बीच सरगुजा DEO दिनेश झा का हैरान करने वाला फरमान सामने आया. जिसमें कहा गया कि जब अभिभावक करेंगे शिकायत तभी निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी|
निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सरगुजा DEO का अनोखा फरमान
सरगुजा जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों के लिए एक अनोखा अपील जारी किया गया है, जिसे पढ़कर हर अभिभावक हैरान और परेशान है, ऐसा इसलिए क्योंकि जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावक DEO दफ्तर में शिकायत कर सकते हैं. उनके शिकायत के बाद ही निजी स्कूलों की मनमानी पर कार्रवाई की जा सकती है, जबकि दूसरी तरफ अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों की मनमानी से हुए त्रस्त है और अगर वह जिला शिक्षा अधिकारी के पास स्कूलों की मनमानी के खिलाफ शिकायत करते हैं तो उन्हें और उनके बच्चों को स्कूल संचालकों के द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है. पहले भी ऐसी प्रताड़ना की घटना सामने आ चुकी है ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी को बिना किसी शिकायत का इंतजार किए बिना मनमानी करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए|
क्या है पूरा मामला?
- अंबिकापुर में निजी स्कूलों के द्वारा एनसीईआरटी की किताब के जगह प्राइवेट पब्लिकेशंस की किताबें पढ़ाई जा रही है और इन किताबों को खरीदने के लिए अभिभावकों और उनके बच्चों पर दबाव बनाया जाता है.
- यही वजह है कि अंबिकापुर के कार्मेल स्कूल, होली क्रॉस स्कूल, दशमेश स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, उर्सु लाइन स्कूल सहित कई स्कूलों की किताबें और कॉपियां अंबिकापुर के कुछ चुनिंदा डिपार्टमेंटल स्टोर में ही उपलब्ध है.
- अंबिकापुर के नवापारा में तो किताब दुकान के बाहर इन स्कूलों के नाम वाला बोर्ड लगाकर इनके द्वारा पढ़ाई जाने वाली निजी प्रकाशकों की किताबों का लिस्ट और रेट तक चस्पा किया गया है.
- किताब दुकानदार प्राइमरी स्कूल की कक्षाओं की किताबें 5 से ₹7000 में बेच रहे हैं इतना ही नहीं कॉपियां भी उन्हीं कंपनियों का खरीदने का दबाव है जिन कंपनियों की कॉपी खरीदने का दबाव निजी स्कूल संचालकों ने बच्चों पर बनाया हुआ है.
ABVP ने किया था प्रदर्शन
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कल निजी स्कूलों की इसी मनमानी के खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया था और जमकर नारेबाजी की थी. इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश झा ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से कहा था कि वह इस मामले में सख्त कार्यवाही करेंगे, लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि प्रदर्शन के कुछ घंटे बाद उन्होंने कार्यवाही करने की बजाय अभिभावकों से शिकायत करने की अपील वाला पत्र जारी कर दिया और खुद को पूरे मामले से किनारे कर लिया. यही वजह है कि अब जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका भी निजी स्कूलों और किताब दुकानदारों के बीच संदिग्ध दिखाई दे रही है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जिला शिक्षा अधिकारी सीधे तौर पर बिना किसी शिकायत के इंतजार किए बिना निजी स्कूल संचालकों और निजी किताब दुकानदारों के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं कर सकते हैं?
अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल संचालकों के द्वारा बच्चों को 100 फ़ीसदी किताबें निजी प्रकाशको की पढ़ाई जा रही है. स्कूलों में गठित अभिभावकों की कमेटी सिर्फ कागजों भर में संचालित है. कुछ अभिभावकों को जिन्हें स्कूलों के द्वारा उपकृत किया जाता है उन्हीं को कमेटी में शामिल किया जाता है. इस कमेटी के अभिभावकों से स्कूल संचालक जैसा चाहते हैं वैसा दस्तावेज तैयार कर अपने पक्ष में हस्ताक्षर कर लेते हैं और फिर पूरा रैकेट संचालित होता है|
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