30 या 31? कब है पुत्रदा एकादशी, काशी के पंडित ने बताई सही तारीख, ये भी जानें इस व्रत से मिलेगा क्या
हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है. वैसे तो साल में 24 एकादशी के व्रत पड़ते हैं. इन सभी एकादशी व्रत का अपना अलग महत्त्व होता है. शास्त्रों के मुताबिक, हर एकादशी व्रत से अलग-अलग मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को ‘पुत्रदा एकादशी‘ के नाम से जानते हैं. इस बार तिथियों में हेरफेर के कारण पुत्रदा एकादशी की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति है. अगर आप भी इसे लेकर कन्फ्यूज हैं तो आज ही काशी के ज्योतिषी से अपना कंफ्यूजन दूर कर लीजिए. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर पंडित सुभाष पांडेय बताते हैं कि पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस व्रत को पुत्र रत्न की प्राप्ति की इच्छा से रखते हैं. जिन्हें संतान है, वे उनकी सलामती और उत्तम कामना से इस व्रत को करते हैं.
हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस बार पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 30 दिसम्बर तड़के 2 बजकर 51 मिनट से हो रही है. इस दिन सूर्योदय व्यापिनी एकादशी तिथि पूरे दिन मिल रही है. ऐसे में शैव और वैष्णव दोनो ही सम्प्रदाय के लोग 30 दिसम्बर को एकादशी का व्रत रखेंगे और भगवान विष्णु की पूजा आराधना करेंगे. साल से सभी एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य को ज्ञान-अज्ञात पापों से मुक्ति मिल जाती है. इसलिए इस व्रत को विशेष पुण्यकारी माना जाता है.
कैसे करें इस दिन पूजा
पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ ही शास्त्रों में शालिग्राम की पूजा का भी विशेष महत्त्व बताया गया है. शालिग्राम को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है. इस दिन शालिग्राम को सुगंधित द्रव्य अर्पित करना चाहिए. कमल के फूल और तुलसी पत्ते की डाल से श्रृंगार करें. इस दौरान चंदन का लेप भी लगाना चाहिए. फिर धूप-अगरबत्ती और घी का दीपक जलाकर पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य को धन, ऐश्वर्य और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है. मनुष्य की मनचाही मुराद भी श्रीहरि विष्णु पूरी करते हैं.
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