उज्जैन में नए साल की धूम, महाकाल-काल भैरव मंदिर में किया गया दर्शन का नया प्रबंध
25 दिसंबर से नए साल तक लगने वाली छुट्टियों में अधिकतर लोग घूमने निकल पड़ते हैं। पर्यटक स्थलों से लेकर धार्मिक स्थानों तक भीड़ देखने को मिलती है। इस साल भी ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकाल मंदिर में भक्तों की आस्था उमड़ती नजर आ रही है।
महाकाल मंदिर में वैसे भी साल भर भक्तों का आना जाना लगा रहता है। महाकाल लोक के निर्माण के बाद यहां प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ गई है। अब नए साल को देखते हुए श्रद्धालुओं का आंकड़ा बढ़ रहा है। इसी के चलते मंदिर की दर्शन व्यवस्था में भी बदलाव हुआ है। महाकालेश्वर के अलावा शहर के अन्य मंदिरों में भी भीड़ को देखते हुए प्रबंध किए गए हैं।
महाकाल में 12 लाख श्रद्धालु आने की उम्मीद
मंदिर में दर्शन के लिए सामान्य दिनों में 120000 तक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वीकेंड के मौके पर ये आंकड़ा डेढ़ से पौने दो लाख तक जा रहा है। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से 25 दिसंबर से 31 जनवरी तक 6 लाख और नए साल पर 12 लाख श्रद्धालुओं के आने का अंदाजा लगाया जा रहा है।
कैसी है दर्शन व्यवस्था
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को मानसरोवर गेट से प्रवेश दिया जा रहा है। यहां से बैरिकेड से होते हुए टनल के जरिए वह गणेश मंडपम तक पहुंच रहे हैं। दर्शन के बाद उन्हें बड़ा गणेश मंदिर पर बने निगम मार्ग से बाहर निकाला जा रहा है। जो श्रद्धालु 250 रुपए की शीघ्र दर्शन की रसीद ले रहे हैं, उन्हें बड़ा गणेश मंदिर से होते हुए बैरिकेड के जरिए टनल से गणेश मंडपम पहुंचाकर लाइन नंबर एक से दर्शन करवाए जा रहे हैं।
किए गए ये बदलाव
महाकाल मंदिर सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया के मुताबिक भीड़ को देखते हुए 27 दिसंबर से 5 जनवरी तक प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था बंद कर दी गई है। केवल VVIP श्रद्धालुओं को प्रोटोकॉल दिया जाएगा। आम श्रद्धालु सामान्य रूप से या फिर 250 रुपए की शीघ्र दर्शन व्यवस्था से दर्शन कर सकते हैं। शहर के बाहर पार्किंग व्यवस्था की गई है। बाहर से आने वाले वाहनों को वही रोका जाएगा क्योंकि अंदर की पार्किंग लगभग फुल चल रही है।
कालभैरव में भी आस्था का संगम
उज्जैन केवल महाकालेश्वर के लिए नहीं बल्कि अपने अन्य मंदिरों के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। इन्हीं में से एक बाबा काल भैरव का स्थान है। ये विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां विराजित बाबा भैरव स्वयं मदिरापान करते हैं। यहां भोग के रूप में मदिरा चढ़ाई जाती है। इस साल मंदिर समिति ने नए साल तक 8 से 10 लाख भक्तों के आने की उम्मीद लगाई है।
कैसी है दर्शन व्यवस्था
आने वाली भीड़ को देखते हुए मंदिर में प्रोटोकॉल व्यवस्था बंद कर दी गई है। श्रद्धालुओं को 7 लेयर बेरीकेड्स से मंदिर के प्रवेश द्वार तक पहुंचा जा रहा है। दर्शन करने में श्रद्धालुओं को लगभग 2 घंटे लग रहे हैं।
क्या बदलाव हुआ
काल भैरव मंदिर पुजारी ओमप्रकाश चतुर्वेदी के मुताबिक दर्शनार्थियों को असुविधा ना हो इसलिए शौचालय और पीने के पानी की उचित व्यवस्था की गई है। मंदिर प्रांगण में मेडिकल टीम भी तैनात है। 50 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा निजी कंपनी के 30 सुरक्षा कर्मचारी भी व्यवस्था संभाल रहे हैं। वाहन पार्किंग की व्यवस्था शुद्ध नदी के किनारे पुल के पास की गई है। महाकाल और काल भैरव के अलावा मंगलनाथ, गढ़कालिका, हरसिद्धि सहित अन्य मंदिरों में भी भक्तों की आस्था उमड़ रही है।
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