गुझिया-पपची नहीं, ठंड में छत्तीसगढ़ की रसोइयों में बनते हैं ये खास व्यंजन! आप भी नोट करें नाम और रेसिपी
सर्दियों की ठंडी सुबह में गरम और हेल्दी नाश्ता किसी के भी मूड को फ्रेश कर देता है। अगर ये नाश्ता स्वादिष्ट भी हो, तो दिन की शुरुआत और भी शानदार हो जाती है। छत्तीसगढ़ में कुछ पारंपरिक फूड्स हैं जो सर्दियों में खास लोकप्रिय होते हैं और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं।
सबसे पहले चावल का चीला ट्राई करें। यह चावल से बनता है और अदरक-धनिया टमाटर की चटनी के साथ खाने में बहुत टेस्टी लगता है। सुबह के लिए हल्का और पौष्टिक विकल्प है।
इसके अलावा फरा भी सर्दियों में काफी पसंद किया जाता है। यह चावल के आटे से बनता है और भाप में पकाकर राई व जीरा का तड़का लगाया जाता है। यह पेट के लिए हल्का और सुपाच्य विकल्प है।
अंगाकर रोटी छत्तीसगढ़ की एक और खास डिश है। इसे चावल और चावल के आटे से अंगार पर सेंक कर बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है।
ग्रामीण इलाकों में खासकर गुड़ वाला बोबर चिला या बोबरा रोटी का सेवन बहुत किया जाता है। यह मीठा और पौष्टिक होता है और बच्चों को भी पसंद आता है।
सर्दियों में बफौरी भी खाने का आनंद बढ़ा देती है। इसे चना दाल या अन्य दालों को पीसकर भाप में पकाया जाता है। यह प्रोटीन से भरपूर और हल्का नाश्ता है।
छत्तीसगढ़ के ये पारंपरिक नाश्ते न केवल स्वाद में लाजवाब हैं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी हैं। सर्दियों में इन्हें सुबह के समय खाकर दिन की शुरुआत ताजगी और ऊर्जा के साथ करें।
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