तेल कंपनियों का मुनाफा 11 रुपये प्रति लीटर तक, ग्राहकों पर महंगाई का बोझ बरकरार
व्यापार: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल पर लगातार भारी मुनाफा कमा रही हैं। इसके बावजूद ग्राहकों को इसका कोई फायदा नहीं दे रही हैं। कच्चे तेल का भाव मार्च से 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना हुआ है। इससे घरेलू तेल कंपनियां पेट्रोल पर 11.20 रुपये और डीजल पर 8.10 रुपये प्रति लीटर का मुनाफा कमा रही हैं। दरअसल, घरेलू कंपनियां रूस से लगातार सस्ते भाव पर कच्चा तेल खरीद रही हैं। हाल में रूस ने कहा था कि वह भारत को पांच फीसदी की और छूट देगा। इससे आने वाले समय में भी भारत को सस्ते भाव पर कच्चा तेल मिलता रहेगा।
ब्रोकरेज हाउसों का कहना है कि क्रूड में नरमी से घरेलू तेल कंपनियों के मार्जिन में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। जेफरीज के इक्विटी विश्लेषक भास्कर चक्रवर्ती ने कहा, डीजल/पेट्रोल पर 8.1/11.2 रुपये प्रति लीटर का विपणन मार्जिन तय मानक स्तर से काफी ज्यादा है। चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में भी इन कंपनियों के आय को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
अप्रैल-जून में 16,184 करोड़ का मुनाफा
तीनों घरेलू कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जून अवधि में पेट्रोल-डीजल बेचकर कुल 16,184 करोड़ का मुनाफा कमाया है। यह सालाना आधार पर ढाई गुना अधिक है। बीपीसीएल अप्रैल-जून में 6,124 करोड़ रुपये के मुनाफे के साथ सबसे आगे रही। आईओसी ने 5,689 करोड़ रुपये और एचपीसीएल ने 4,371 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया।
कंपनियों को प्रति बैरल 4.88 डॉलर तक कमाई
बीपीसीएल ने क्रूड के प्रत्येक बैरल को पेट्रोल और डीजल में बदलकर 4.88 डॉलर की कमाई की। आईओसी ने 2.15 और एचपीसीएल 3.08 डॉलर की कमाई की। बीपीसीएल ने हर पंप पर मासिक 153 और आईओसी ने 130 किलोलीटर ईंधन बेचा। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक, अप्रैल-जून की बंपर कमाई में पेट्रोल बिक्री पर अनुमानित 10.3 रुपये प्रति लीटर (एक साल पहले 4.4 रुपये) और डीजल पर 8.2 रुपये प्रति लीटर (पिछले साल 2.5 रुपये) का योगदान रहा।
क्रूड 21% सस्ता, एलपीजी पर सब्सिडी भी
हाल में कच्चा तेल 21 फीसदी तक सस्ता हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ईंधन दरों में 16-18 फीसदी की कमी के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रहीं। एलपीजी पर भारी सब्सिडी देने के बावजूद तीनों घरेलू तेल कंपनियों ने मुनाफा दर्ज किया। सरकार ने तीनों कंपनियों को लागत से कम दरों पर रसोई गैस बेचने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 30,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा की है।
सरकार ने लगाया था दो रुपये उत्पाद शुल्क
सरकार ने इस साल अप्रैल में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 2-2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। हालांकि, खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ, क्योंकि उत्पाद शुल्क में वृद्धि को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में गिरावट के कारण खुदरा कीमतों में हुई कमी के विरुद्ध समायोजित किया गया था।
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