लोकतंत्र सिर्फ शासन पद्धति नहीं, बल्कि जीवन की आत्मा है : नरेंद्र सिंह तोमर
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि भारत का लोकतंत्र केवल शासन करने का तरीका नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन की आत्मा है। उन्होंने दिल्ली में आयोजित स्व. विट्ठल भाई पटेल शताब्दी वर्ष समारोह में अखिल भारतीय पीठासीन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने ही दुनिया को लोकतंत्र का बीज दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र हमारे लिए सिर्फ संविधान से मिला अधिकार नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्षों से चली आ रही हमारी संस्कृति, समाज और राजनीति का एक अभिन्न हिस्सा है।
दिल्ली विधानसभा में भारत - लोकतंत्र की जननी विषय पर अपने व्याख्यान में तोमर ने कहा कि दुनिया में कई लोग मानते हैं कि लोकतांत्रिक मूल्यों की शुरुआत यूनान से हुई, लेकिन सच यह है कि भारत में इसकी नींव बहुत पहले पड़ चुकी थी। उन्होंने ऋग्वेद और अथर्ववेद में उल्लेखित सभा और समिति जैसी प्राचीन संस्थाओं का जिक्र किया, जो सामूहिक निर्णय का प्रतीक थीं, जहाँ राजा को भी अपनी राय थोपने का अधिकार नहीं था।
तोमर ने कहा कि भारत की चुनाव प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जो हर पांच साल में शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता का हस्तांतरण सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ वोट देना और सरकार चुनना नहीं है, बल्कि यह ऐसी व्यवस्था है जहाँ सबका कल्याण, सबकी साझेदारी और सबकी सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भी हमारा लोकतंत्र मजबूत है, क्योंकि यह हमारी संस्कृति और जनता की चेतना में गहराई से रचा-बसा है। उन्होंने सभी से इस लोकतांत्रिक परंपरा को और सशक्त बनाने का आग्रह किया।
दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में देश भर के लगभग 12 विधानसभा अध्यक्षों/उपाध्यक्षों ने अपने विचार रखे। इस दौरान लोकसभा के पूर्व स्पीकर मीरा कुमार और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी विशेष रूप से उपस्थित थे।
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