27 अगस्त को मनायी जाएगी गणेश चतुर्थी
गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाया जाता है। । गणेश पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी पर भक्तजन अपने घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं। पंचांग की गणना के अनुसार गणेश चतुर्थी तिथि का आरंभ 26 अगस्त को दोपहर में 1 बजकर 55 मिनट पर होगा और 27 अगस्त को 3 बजकर 45 मिनट तक चतुर्थी तिथि रहेगी। ऐसे में गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त से शुरू होगा। हालांकि, जो लोग गणेश चतुर्थी का व्रत करना चाहते हैं तो उन्हें 26 अगस्त को व्रत रखना चाहिए। क्योंकि, चतुर्थी का व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है। ऐसे में 26 अगस्त को रात के समय चतुर्थी तिथि रहेगी इसलिए व्रत 26 अगस्त को किया जाएगा। हालांकि, गणेशजी की स्थापना 27 अगस्त को करना ही शुभ रहेगा। क्योंकि, गणेश पुराण के अनुसार गणेशजी का जन्म दोपहर के समय हुआ था और 27 तारीख को उदय तिथि में गणेश चतुर्थी दोपहर तक रहने वाली है इसलिए गणेश जी की स्थापना 27 अगस्त को की जाएगी। बता दें कि गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त से 6 सितंबर अनंत चतुर्दशी तिथि के दिन तक रहेगा।
गणेश चतुर्थी पर इन बातों का ख्याल
1 ) भगवान गणेश की जिस मूर्ति में उनकी सूंड बाई तरफ होती है वैसी मूर्ती घर लाना बहुत ही शुभ माना जाता है।
2 )बैठी हुई प्रतिमा ही घर लाएं। इससे घर में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहती है।
3 ) भगवान गणेश का हाथ आशीर्वाद देती हुई मुद्रा में होना चाहिए और दूसरे हाथ में मोदक होना चाहिए। ऐसी प्रतिमा की स्थापना करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
4 ) भगवान गणेश की स्थापना ईशान कोण में करनी चाहिए और बप्पा को इस तरह से विराजमान करें की उनका मुख उत्तर की तरफ हो।
5) बप्पा को स्थापित करने से पहले लकड़ी की चौकी को अच्छे से साफ करके और गंगाजल से शुद्ध करके फिर उसपर लाल कपड़ा बिछाकर ही बप्पा को विराजमान करें।
गंगा एक्सप्रेसवे से 5700 युवाओं को रोजगार, यूपी में बढ़ेगा रोजगार का दायरा
गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी के फ्लैट में भीषण आग, इलाके में मचा हड़कंप
इंदौर में रिश्वतखोरी पर बड़ी कार्रवाई, PWD अधिकारी सस्पेंड, ग्वालियर अटैच
इंदौर के जलूद में 271 करोड़ की सोलर परियोजना तैयार, CM करेंगे उद्घाटन
पश्चिम बंगाल में 142 सीटों पर मतदान जारी, बूथों पर सुबह से लंबी कतारें
एक्सप्रेसवे पर टोल दरें लागू, कार चालकों को चुकाने होंगे करीब ₹1500
Devi Bhagavata Purana का रहस्य: कौन हैं Durga के स्वामी?
क्या आज भी पृथ्वी पर हैं Hanuman? Ramayana के बाद की रहस्यमयी कथा
1.5 लाख बाराती, 7500 किलो चावल… मदुरै की महारानी की शादी का शाही जलवा