72 घंटे में 7 लाशें... कुबेरेश्वर धाम बना मौत का धाम, जवाबदेही कौन तय करेगा?
सीहोर: कुबेरेश्वर धाम में कांवड़ यात्रा के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आए थे। कांवड़ यात्रा खत्म हो गई है लेकिन बीते तीन दिनों में कुबेरेश्वर धाम में सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। ये मौतें अव्यवस्था की वजह से हुई है। वहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, तंत्र और कुबेरेश्वर धाम प्रबंधन का कहना है कि उम्मीद से अधिक भीड़ आ गई।
अब तक सात मौतें हुई
कुबेरेश्वर धाम में गुरुवार को भी दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। यूपी के गोरखपुर के रहने वाले 22 वर्षीय उपेंद्र गुप्ता की मौत हार्ट अटैक से हुई है। इसके बाद एक अन्य श्रद्धालु की मौत हुई। रायपुर के 57 वर्षीय दिलीप सिंह की मौत हो गई। बुधवार को गुजरात के पंचवल के 50 वर्षीय चतुर सिंह और रोहतक के 65 वर्षीय ईश्वर सिंह की मौत हो गई है। साथ ही पांच अगस्त को राजकोट की जसवंती बेन और फिरोजाबाद की संगीता गुप्ता की मौत हो गई थी।
उम्मीद लिए आए थे कुबेरेश्वर धाम
मरने वाले सभी श्रद्धआलु भक्ति के कुबेरेश्वर धाम आए थे। वहीं, खराब व्यवस्था ने इनसे इनकी जिंदगी छीन ली है। इनके शव को जिला अस्पताल के पीएम हाउस में रखा गया है। परिजन शव को आकर ले जाएंगे।
भीड़ नियंत्रित नहीं हो पाई
कांवड़ यात्रा के लिए लाखों की संख्या में वहां श्रद्धालु जमा हुए थे। भोपाल-इंदौर हाईवे पर घंटों लोग जाम की समस्या से जूझते रहे। लेकिन प्रशासन के सारे दावे फेल हो गए। भीड़ नियंत्रित नहीं हो पाई। पानी, भोजन और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा था कि उम्मीद से ज्यादा भीड़ आ गई। यह कुंभ जैसा उत्सव होता है।
गर्मी ने बढ़ाई मुसीबत
दरअसल, एमपी में बारिश अभी नहीं हो रही है। उमस वाली भीषण गर्मी पड़ रही है। इसकी वजह से श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ गई। गर्मी, भूख और थकान से वे परेशान थे। गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश से लगातार श्रद्धालु आ रहे थे। लेकिन, वहां शौचालय, पीने का पानी, सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी।
सिस्टम कम पड़ गया
एक टीवी चैनल से बात करते हुए कैबिनेट मंत्री गोविंद राजपूत ने माना कि भीड़ उम्मीद से ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सिस्टम कम पड़ रहा है। मैं प्रशासन से नियंत्रण लेने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा
इसे लेकर राजनीति भी हो रही है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह ने कहा कि आस्था विफलता को सही नहीं ठहराती। पंडित प्रदीप मिश्रा रुद्राक्ष बांटें या न बांटे, यह उनकी मर्जी है। लेकिन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा।
पानी और शौचालय
वहीं, एक भक्त ने कहा कि वहां न तो पानी और न ही शौचालय की व्यवस्था थी। उन्होंने हमसे खाने के पैसे लिए। समिति ने कुछ नहीं कहा। महिलाओं को धक्का दिया गया। बुजुर्ग गिर रहे थे। पुलिस बस देख रही थी।
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