नीतीश कैबिनेट में 7 नए बीजेपी मंत्रियों में 4 के पास है कई पार्टियों का अनुभव
पटना। इस साल बिहार विधानसभा चुनाव होना है। इससे पहले नीतीश कुमार की अगुवाई वाली कैबिनेट का बुधवार को विस्तार किया गया। इस कैबिनेट विस्तार में 7 नए मंत्री बनाए गए हैं। सभी सातों मंत्री बीजेपी कोटे से हैं, जिन सात विधायकों को मंत्री बनाया गया है, उनमें से एक ऐसे हैं जो कभी भी बीजेपी के टिकट पर विधानसभा सदस्य निर्वाचित नहीं हुए। साल 2020 में भी दूसरे दल के सिंबल पर ही विधानसभा पहुंचे और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे। बता दें चार नेता ऐसे हैं जो दूसरे दलों की सियासत का अनुभव रखते हैं।
नीतीश सरकार के नए मंत्रियों में विजय मंडल दल-बदल की सियासत का सबसे माहिर चेहरा हैं। विजय मंडल के पास आनंद मोहन की अगुवाई वाली बिहार पीपुल्स पार्टी से लेकर लालू यादव की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), लोक जनशक्ति पार्टी का भी अनुभव है। विजय मंडल 1995 के बिहार चुनाव में पहली बार आनंद मोहन की पार्टी से अररिया सीट से विधायक चुने गए थे। तब वह इस पार्टी के इकलौते विधायक थे। साल 2000 में वे निर्दलीय चुनाव जीते। 2005 में आरजेडी के टिकट पर मैदान में उतरे लेकिन वह चुनाव हार गए थे।
2005 में अररिया से विधायक बने प्रदीप कुमार सिंह 2009 के आम चुनाव में लोकसभा का चुनाव जीत का सांसद बन गए और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। रिक्त हुई अररिया विधानसभा सीट से उपचुनाव में विजय मंडल लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा। 2010 में एलजेपी ने विजय को सिकटी से टिकट दिया लेकिन वे हार गए। इसके बाद विजय ने फिर से पाला बदला और बीजेपी में शामिल हो गए जिसके उम्मीदवार से शिकस्त मिली थी। 2015 और 2020 में बीजेपी के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। निर्दलीय को भी दल के रूप में गिन लें तो विजय मंडल के पास पांच दलों का अनुभव है।
कैबिनेट विस्तार में मंत्री बनाए गए राजू सिंह भी राजनीतिक दलों के अनुभव के आधार पर विजय मंडल के करीब ही हैं। मुजफ्फरपुर के साहेबगंज से विधायक राजू को चार दलों से राजनीति करने का अनुभव है। फरवरी 2005 के बिहार चुनाव में पहली बार विधायक बने राजू अक्टूबर, 2005 के चुनाव में जनता दल (यूनाइटेड) से विधायक बने। 2010 में भी जेडीयू विधायक रहे राजू 2015 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 2020 के बिहार चुनाव में वह मुकेश सहनी की अगुवाई वाली विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) से चुनाव जीते और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे। चार पार्टियों का अनुभव रखने वाले राजू सिंह ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा तो लेकिन पार्टी के सिंबल पर कभी विधानसभा नहीं पहुंचे।
बिहार कैबिनेट के विस्तार में जेडीयू कोटे से एक भी नहीं था लेकिन इसमें दो मंत्री ऐसे हैं जो नीतीश कुमार की अगुवाई वाली पार्टी से ही बीजेपी में आए हैं। इन मंत्रियों की सूची में बिहारशरीफ के विधायक डॉ सुनील कुमार और अमनौर से विधायक कृष्ण कुमार मंटू के नाम हैं। दो बार बीजेपी विधायक डॉ सुनील तीसरी बार विधायक हैं। सुनील 2010 के बिहार चुनाव में जेडीयू के टिकट पर विधानसभा सदस्य चुने गए थे। डॉक्टर सुनील की तरह कृष्ण कुमार मंटू भी 2015 और 2020 में बीजेपी के टिकट पर विधायक बने लेकिन पहली बार 2010 में विधानसभा का चुनाव जेडीयू से जीते थे।
ममता का दर्दनाक अंजाम, जिन बेटों के लिए मां-बाप ने मांगी लंबी उम्र, उन्हीं ने छीन ली उनकी जिंदगी
छात्रों पर कार्रवाई के विरोध में बोले नसीरुद्दीन शाह, दिल्ली पुलिस को लेकर दिया विवादित बयान
शरद पवार-सुप्रिया सुले की पीएम मोदी से मुलाकात, राजनीतिक अटकलों का दौर शुरू
महज 18 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा, 'गॉडजिला एक्स कॉन्ग' एक्ट्रेस केली हॉटल का निधन
शारदा नदी का जलस्तर बढ़ते ही लखीमपुर खीरी में बाढ़ का संकट, कई गांवों का संपर्क कटा
T20 सीरीज से पहले पिच का पूरा विश्लेषण, हरारे में बल्लेबाजों या स्पिनर्स में किसका रहेगा दबदबा?
संसद परिसर में काले कपड़ों में विपक्ष का विरोध, सरकार पर साधा निशाना
NEET विवाद के बीच सीएम थलपति की मांग, परीक्षा प्रणाली समाप्त करने की अपील
बालेन शाह का बड़ा यू-टर्न, भारत-चीन राजदूतों से बातचीत के लिए दिखाई सहमति