6 साल तक पार्टी में शामिल नहीं हो सकेंगे, भाजपा ने 100 से ज्यादा बागियों को पार्टी से निकाला
रायपुर: टिकट न मिलने पर पार्टी से बगावत कर नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लड़ने वाले करीब 100 प्रत्याशियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. इन बागियों को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को चेतावनी भी दी गई कि अगर वे बागियों के साथ किसी भी तरह के चुनाव प्रचार में शामिल हुए तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा बागी
बता दें कि निकाय चुनाव में भाजपा ने सबसे ज्यादा पार्षदों के टिकट काटे हैं. ऐसे में कई वरिष्ठ और कनिष्ठ पार्षदों को भी टिकट नहीं मिला है. ऐसे में वे पार्टी से बगावत कर चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों के लिए मुसीबत बन गए हैं. ऐसे में जहां भी भाजपा प्रत्याशियों के कमजोर होने की खबरें आ रही हैं, वहां भाजपा ने ऐसे बागियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है. ताकि मतदाताओं के बीच यह संदेश जाए कि बागी अब भाजपा के सदस्य नहीं रहे और वोट भाजपा को ही जाना चाहिए।
रायपुर नगर निगम में 15 से 20 बागी
रायपुर नगर निगम चुनाव में ही भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ 15 से 20 बागी मैदान में हैं। ऐसे में भाजपा के वोट बंटने की आशंका है। इन सबके मद्देनजर भाजपा शहर जिला ने प्रदेश संगठन से इन बागियों को तत्काल निष्कासित करने की अनुशंसा की है। आने वाले दिनों में ऐसे बागियों का निष्कासन आदेश जारी किया जाएगा। बताया जाता है कि कुछ बागियों को निष्कासित भी किया गया है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह-2026 की तैयारियां प्रारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव पन्ना में 204 करोड़ रूपए से अधिक राशि के 22 विकास कार्यों की देंगे सौगात
क्या खत्म होगा संसद का गतिरोध? NEET विवाद पर राहुल गांधी की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल
CJP प्रदर्शन पर सरकार का रुख साफ, बोली- बातचीत के लिए हमेशा तैयार, 24 घंटे में दिए 4 प्रस्ताव
मस्जिद में मासूम से कथित वारदात, आरोपी मौलाना पर FIR; जांच शुरू
शिक्षा पर सरकारी खर्च का रिपोर्ट कार्ड, मोदी सरकार के 12 साल के आंकड़े क्या कहते हैं?
ट्रेन लेट हुई तो यात्रियों का फूटा गुस्सा, झाबुआ में रेलवे ट्रैक पर दिया धरना
हिमाचल के मंत्री विक्रमादित्य का PM मोदी से आग्रह, बोले- युवाओं से सीधे जुड़ें
वकील दंपती के साथ कथित जातीय भेदभाव, ₹35 हजार जुर्माना और सामूहिक दावत का दबाव